मंथन डेस्क

GAYA:मगध में गया शहर का मुहर्रम मशहूर है.यहां के कर्बला की मिसाल पूरे बिहार में नहीं मिलती.मुहर्रम का चांद देखे जाने के दिन से 11 तारीख़ तक इक़बाल नगर स्थित कर्बला में मुहर्रम की धूम रहती है.लगभग सभी जगह पर मुहर्रम यौम ए आशूरा के दिन यानी दसवीं को को ख़त्म हो जाता है.मगर गया शहर में ग्यारह की रात तक अखाड़ा जमता रहता है.मुहर्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो इसके लिए बुधवार को कर्बला ट्रस्ट और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बैठक हुई.इसमें कहा गया कि अखाड़ा में डीजे बजाने की इजाज़त नहीं होगी.डीजे से नॉनसेंस पैदा होता है और यह मुहर्रम जैसे महत्वपूर्ण त्योहार का अपमान है.मुहर्रम हुसैन के रास्ते पर चलने का नाम है,डीजे बजाने का नहीं.कर्बला प्रांगण में संपन्न हुई बैठक में मुहर्रम को शांति और सौहार्द के वातावरण में मनाने की बात कही गयी है.

क्या कहा इक़बाल हुसैन ने?

कर्बला ट्रस्ट के अहम सदस्य और पीस असोसिएशन ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव इक़बाल हुसैन ने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस्लाम का संदेश देने वाला महीना मुहर्रम में ‘मुन्नी बदनाम हुई’गाना का मज़ा लेना इस्लाम नहीं है.यह मज़हब का अपमान है.यह यज़ीदियों का तरीक़ा हो सकता है,इमाम हुसैन का नक़्श ए क़दम नहीं.इसलिए अखाड़ा,ताज़िया के साथ डीजे की अनुमति नहीं होगी.अखाड़ा लायें,डीजे नहीं लायें.ताज़िया लेकर आयें,डीजे लेकर नहीं आयें.सारा बिगाड़ का जड़ डीजे ही है.उन्होंने कहा कि इसी कर्बला में कुछ लोग मज़े के लिए मुन्नी बदनाम हुई गाना तक सुनने को मिला है.इस पवित्र जगह पर डीजे,गाना बजना मुहर्रम के संदेश के बरक़्स है.इस्लाम का यह संदेश नहीं है.उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन द्वारा निर्धारित समय में जुलूस,अखाड़ा ख़त्म करने की कोशिश करनी चाहिये.

बैठक में कौन-कौन हुए शामिल

इस अवसर पर शहर के एडिशनल एस डी ओ, सिटी डीएसपी, थाना अध्यक्ष,कर्बला ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मसूद मंजर,ख़ादिम कर्बला डॉक्टर शाह शब्बीर आलम, समाजसेवी शाहिद खान ,निवर्तमान वार्ड पार्षद नैयर अहमद, मोइनुद्दीन, पूर्व वार्ड पार्षद हलीम खान,युवा समाजसेवी बादशाह, आमिर सोहेल, सद्दाम हुसैन के अलावा शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे

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