राज्य में आधा दर्जन अल्पसंख्यक संस्थानों में पदाधिकारी नहीं है.कुछ महीनों से और कुछ वर्षों से ख़ाली पड़े हैं.इनकी बहाली को लेकर न मुख्यमंत्री चिंतित हैं न समाज फ़िक्रमंद है.1-अणे मार्ग में आयोजित इफ़्तार पार्टी में मुद्दों पर बात करने की बजाय मुस्लिम रहनुमा,बुद्धिजीवी,पत्रकार आदि मुर्ग़ मुसल्लम उड़ा कर चले आये.

सेराज अनवर

जुमा को वज़ीरआला बिहार ने रोज़ेदारों को दावत ए इफ़्तार पर बुलाया.परिवार के एक सदस्य के रूप में घंटों रोज़ेदारों के साथ बैठे रहे.दुःख-सुख बतियाया.मुसलमान भी इस पल को यादगार बनाने में जुटे रहे.ख़ूब फ़ोटोग्राफी हुई.माहौल ख़ुशगवार था.ऐसे भी नीतीश कुमार कहते रहे हैं वोट की चिंता के बेग़ैर वह काम करने में यक़ीन रखते हैं.काम करने के लिए इदारा चाहिए.इदारा में पदाधिकारी चाहिए.राज्य में आधा दर्जन अल्पसंख्यक संस्थानों में पदाधिकारी नहीं है.कुछ महीनों से और कुछ वर्षों से ख़ाली पड़े हैं.इनकी बहाली को लेकर न मुख्यमंत्री चिंतित हैं न समाज फ़िक्रमंद है.1-अणे मार्ग में आयोजित इफ़्तार पार्टी में मुद्दों पर बात करने की बजाय मुस्लिम रहनुमा,बुद्धिजीवी,पत्रकार आदि मुर्ग़ मुसल्लम उड़ा कर चले आये.जबकि मुख्यमंत्री का मूड अच्छा था.घुले मिले हुए थे.कोई तो जियाला आगे बढ़ कर कहता इफ़्तार तो ठीक है मुख्यमंत्री जी बदहाल इदारों पर भी ध्यान दे देते!

मुसलमान और मुख्यमंत्री रुबरु

कौन-कौन इदारे हैं ख़ाली?

बिहार उर्दू अकादमी का उर्दू के विकास में महती भूमिका है.अकादमी उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के साथ ही उसके विकास का काम करती है.यहां उर्दू से सम्बंधित सेमिनार,मुशायरा,सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है.उर्दू लेखकों की किताबों को प्रकाशित करने के लिए भी आर्थिक मद्द दी जाती है.उर्दू बिहार की दूसरी राज्य भाषा है और यह जान कर हैरानी होगी कि अकादमी कई वर्षों से भंग है.न कमिटी है न सचिव.डॉ.मुश्ताक़ अहमद नूरी के बाद यहां पूर्ण रूप से सचिव की नियुक्ति नहीं हुई है.जिस कारण उर्दू के प्रचार-प्रसार का काम बिल्कुल ठप है.

इसी तरह उर्दू परामर्शदात्रि समिति भी ख़ाली पड़ा है.यह समिति उर्दू के विकास के सिलसिले में परामर्श देने का काम करती है.रूप रेखा तय करती है.समिति में उर्दू के विशेषज्ञ को रखा जाता है.शफी मशहदी के बाद वर्षों से यहां चेयरमैन का पद ख़ाली है.कमिटी भी नहीं है.ज़ाहिर सी बात है परामर्श देने वाला भी कोई नहीं है.जिस कारण कई बार सरकार संकट में पड़ जाती है.विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों की बहाली को लेकर एक सर्कुलर से सरकार की काफी किरकिरी हुई है.

बिहार राज्य मदरसा बोर्ड के चेयरमैन का ओहदा भी ख़ाली पड़ा है.बोर्ड मदरसों के विकास और विस्तार पर काम करता है.यहां से छात्र-छात्राओं की मैट्रिक बोर्ड की तर्ज़ पर मौलवी,आलिम,फ़ाज़िल की डिग्री प्रदान की जाती है.अब्दुल कय्यूम अंसारी के कार्यकाल पूरा होने के बाद से महीनों से चेयरमैन का पद ख़ाली पड़ा है.चेयरमैन नहीं हैं तो कमिटी भी नहीं है.कमिटी के नहीं रहने से मदरसा की योजना ठप पड़ी है.मदरसा से जुड़ा यह एक अहम संस्था है.

मुर्ग़ मुसल्लम उड़ाते मुसलमान

बिहार राज्य हज समिति के सचिव का पद भी रिक्त है.हाफ़िज़ इलियास उर्फ़ सोनू बाबु का कार्यकाल कब का ख़त्म हो चुका है.अभी तक नए चेयरमैन की नियुक्ति नहीं हुई है.यह समिति मुसलमानों ko हज यात्रा पर भेजती है.उसकी सुविधा का ख़्याल रखती है.प्रशिक्षण देती है.ईद बाद से मुसलमान हज यात्रा पर जायेंगे.कमिटी और चेयरमैन के नहीं रहने से दुश्वारी पेश आ सकती है.एक तरह से यह मुसलमानों की धार्मिक संस्था है.

अल्पसंख्यक आयोग का काम मुस्लिम अधिकारों को देखना है.साम्प्रदायिक सौहार्द,सामाजिक कटुता,अत्याचार,शोषण को लेकर सख़्त कार्रवाई करना इस संस्था के ज़िम्मे है.पिछले महीने से आयोग के चेयरमैन का पद भी ख़ाली पड़ा है.यूनुस हकीम के कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह संस्था भी सुचारु रूप से कार्यरत रहने की बाट जोह रहा है.

मुस्लिम चेहरों की मौजूदगी

इफ़्तार पार्टी में कौन-कौन मुस्लिम चेहरे थे शामिल

मुस्लिम समाज का सबसे बड़ा चेहरा मुख्य सचिव आमिर सुबहानी भी इफ़्तार पार्टी में मौजूद थे.प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ.अब्दुल हई भी देखे गये.इस्लामिक स्कॉलर मौलाना शमीम अहमद मुनअमी भी हाज़िर थे.बड़े सहाफ़ियों में उर्दू दैनिक क़ौमी तंज़ीम के सम्पादक अशरफ़ फ़रीद भी उपस्थित थे.बीपीएससी के सदस्य इम्तियाज करीम भी देखे गये. बिहार राज्य सुन्नी वक़्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इरशादुल्लाह,शिया वक़्फ बोर्ड के चेयरमैन अफज़ल अब्बास,मिल्ली कौंसिल के बिहार अध्यक्ष मौलाना अनिसूर्रहमान क़ासमी भी थे.इनके अलावा जदयू रहनुमाओं में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ज़मा खान के साथ जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सलीम परवेज़,एमएलसी मौलाना ग़ुलाम रसूल बलयावी,प्रो.ग़ुलाम गौस,डॉ.ख़ालिद अनवर आदि भी मौजूद थें.इनसे पूछिए कि इफ़्तार तो खाया,मुस्लिम संस्थाओं की बदहाली पर सवाल भी उठाया?

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