सेराज अनवर

GAYA:गया नगर निगम पुनःरोचक मोड़ पर आ गया है.महापौर का चुनाव अवश्यंभावी लगता है.मौजूदा मेयर गणेश पासवान की जातीय गड़बड़ी पकड़ ली गयी है.निर्वाचन आयोग 18 जून को फ़ैसला सुनायेगा.शहर में चर्चा है कि जिलाधिकारी ने महापौर के सभी सुविधा वापस ले ली है मंगलवार को गणेश पासवान की सदस्यता चली जायेगी.ज़ाहिर सी बात है फिर चुनाव का ही रास्ता बचता है.गया नगर निगम महापौर का चुनाव फिर से हो सकता है.इस बीच महापौर गणेश पासवान ने समय मंथन से कहा कि अभी महापौर मैं ही हूं.अफ़वाहों पर ध्यान न दें.18 जून तक इंतेज़ार करें.

क्या है मामला?

वीरेन्द्र कुमार उर्फ गणेश पासवान ने चुनाव के समय अपनी जाति ‘दुसाध’बतायी थी.दुसाध अनुसूचित जाति में आता है.गणेश के ख़िलाफ़ मेयर प्रत्याशी रहे पूर्व विधायक श्याम देव पासवान ने दावा किया कि गणेश झूठ बोल रहे वह दुसाध नहीं बंगाली है और महापौर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है तो वह कैसे चुनाव लड़े?यह सरासर धोखाधड़ी है और इनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिये.इस मामले को लेकर श्याम देव चले गये राज्य निर्वाचन आयोग.श्याम देव के दावा को गम्भीरता से लेते हुए आयोग ने सामान्य प्रशासन विभाग को जांच के निर्देश दे दिये. जांच में पाया गया कि वीरेन्द्र कुमार उर्फ गणेश पासवान जाति से ‘दुसाध’ नहीं हैं.जब वह दुसाध नहीं हैं तो सदस्यता रद्द होनी तय है और चुनाव भी अवश्यंभावी है.हालांकि उनके पास हाईकोर्ट जाने का रास्ता बचता है.गणेश पासवान ने 2017 और 2022 का नगर निगम चुनाव अनुसूचित जाति की सीट पर लड़ा था.जांच में 1979 से पहले के सरकारी दस्तावेज़ में उनके पूर्वजों की जाति ‘बंगाली’पायी गयी है.जबकि उपनाम ‘सरकार’लिखा था.राज्य निर्वाचन आयोग इस मामले की सुनवाई 18 जून को करने जा रहा है.इस तारीख़ पर महापौर विरोधियों की निगाह लगी हुई है.

श्याम देव पासवान प्रेस को जानकारी देते

पहले भी हुए हैं कई के सदस्यता रद्द

गया में गणेश पासवान का मामला कोई नया नहीं है.मालती देवी से लेकर लाछो देवी तक जाति का मामला सुर्ख़ियों में रहा है.मालती देवी बोधगया से विधायक थीं.आरोप लगा कि वह रविदास नहीं है क्योंकि उनके पति भुवनेश्वर यादव से उनकी जाति इंगित होती है.विरोधियों ने केस किया कि दलित सीट बोधगया से उनका चुनाव लड़ना ग़लत है.मालती हालांकि रवि दास जाति की ही थीं.विरोधी केस हार गए.मालती बाद ने नवादा से सांसद भी चुनी गयीं.बाद में उनकी मृत्यु कैंसर से हो गयी.पूर्व वार्ड पार्षद लाछो देवी का भी मामला सुर्ख़ियों में रहा है.2002 में लाछो देवी मेयर की उम्मीदवार हो गयी.बुर्का पहन कर हाउस (कलेक्टरियत)में घुस गयी.तपेश्वर पासवान ने आरोप लगाया कि लाछो दलित नहीं है.उस वक़्त गया नगर निगम महापौर की सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित थी.हालांकि,लाछो वोटिंग से पहले गिरफ़्तार कर ली गयी उस पर पहले से आपराधिक मामले दर्ज थे.बुर्का हटाया गया तो लाछो देवी को देख प्रशासन सकते में पड़ गया उसे हाउस के अंदर ही तुरंत गिरफ़्तार कर लिया गया.वोटिंग हुई तो आशा देवी गया की पहली दलित महिला महापौर चुनी गयी.इसी तरह ओम् प्रकाश और भीम यादव का मामला भी विवादों में रहा वार्ड-40 काउंसिलर रहे ओम् प्रकाश जाति से कुर्मी थे लेकिन बताया था धानुक जाति का.जांच पड़ताल हुआ सदस्यता चली गयी.काउंसिलर भीम यादव को बताते हैं किसी मामला में सज़ा हुई उनकी भी सदस्यता चली गयी.

क्या कहते हैं गणेश पासवान?

गणेश पासवान कहते हैं कि 18 जून को फैसला आना है.अभी मेयर तो मैं ही हूं.यह पूछे जाने पर कि हाईकोर्ट में अपील की है,उनका कहना है कि ग़लत बात है.अभी हाईकोर्ट जाने की बात कहां है.गया डीएम ने मेयर की सुविधा वापस ले ली है,गणेश कहते हैं डीएम के हाथ में यह नहीं है.सब बेबुनियाद बात है,अफ़वाह है.कल नगर निगम स्टैंडिंग कमिटी की बैठक है.हम बैठक में हैं कल.गणेश पासवान कहते हैं कि यह पूरा मामला राजनीति से जुड़ा है.विरोधियों द्वारा षड्यंत्र के तहत गलत तथ्य जुटाए गए हैं.जाति से सम्बंधित सारा तथ्य मेरे पक्ष में है और फैसला भी मेरे पक्ष में ही आयेगा.उधर इस मामले में पक्षकार श्याम देव पासवान ने आदेश की एक प्रति सलंग्न करते हुए अपने आवेदन में मेयर को निगम के किसी कार्य में हस्तक्षेप नहीं करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के आलोक में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है.एक पत्र उन्होंने नगर निगम के आयुक्त को भी दिया है.गणेश ने श्याम देव को 3,827 मतों से हराया था.वीरेंद्र कुमार को 39,910 वोट मिले थे वहीं इनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामदेव पासवान को 36,083 मत प्राप्त हुए थे.3,827 मतों से वीरेंद्र कुमार जीतकर दोबारा मेयर चुने गए थे.हालांकि,वार्ड पार्षद का चुनाव गणेश अपने ही दलित वार्ड में हार गये थे.गणेश को महगठबंधन का समर्थन प्राप्त था और श्याम देव एनडीए के उम्मीदवार थे.गणेश कांग्रेस में और श्याम देव भाजपा में हैं.पूर्व पार्षद लालजी प्रसाद कहते हैं सदस्यता रद्द होने पर चुनाव ही वाहिद रास्ता है.

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