जब तक सरकार के स्तर पर नफरत फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती है, तब तक प्रधानमंत्री के उपरोक्त बयान को भी हर आदमी के खाते में 15 लाख रुपया भेजने जैसी जुमला ही माना जाएगा.

मंथन डेस्क

PATNA:जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय संयोजक अशफाक रहमान ने कहा है कि हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान का स्वागत करते हैं, जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुस्लिम विरोधी बयानबाजी बंद करने को कहा है. वहीं, अशफाक रहमान ने प्रधानमंत्री को सलाह दी है कि वह पहले खुद इस पर अमल करें. आज भी लोगों के मन में वह बात बैठी हुई है जब एक क़ौम की तुलना कुत्ते के पिल्ला से किया गया था.नेता और कार्यकर्ता अपने नेतृत्व की बातों से तभी प्रभावित होते हैं जब वे खुद अपनी कही बातों पर अमल करते हैं.यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री को यह अहसास हो गया है कि उनकी पार्टी के लोग अनावश्यक बयानबाजी कर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं.

अशफाक रहमान का कहना है कि जब तक सरकार के स्तर पर नफरत फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती है, तब तक प्रधानमंत्री के उपरोक्त बयान को भी हर आदमी के खाते में 15 लाख रुपया भेजने जैसी जुमला ही माना जाएगा. अशफाक रहमान का कहना है कि मोदी जी वास्तव में मुसलमानों से हमदर्दी रखते हैं तो न्यूज चैनलों पर समाज में जहर घोलने वाली बहस को तत्काल बंद करायें.प्रधानमंत्री ऐसा कर सकते हैं.उन्हें तुरंत यह क़दम उठाना चाहिए.सिर्फ ज़बानी जमा खर्च से कुछ नहीं होने वाला.नेता की करनी और कथनी एक जैसी होनी चाहिये.

अशफाक रहमान का कहना है कि प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बीजेपी के कार्यकर्ता मुसलमानों के घर-घर जाएं. इससे मुसलमानों को ख़ुशफहमी में पड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है.जिस प्रकार फ़र्ज़ी मौलाना को टीवी पर बैठा कर मुसलमानों को अपमानित और किया जाता है, उसी प्रकार फ़र्ज़ी मुसलमानों से मिल खानापूर्ति कर दी जायेगी .अशफाक़ रहमान का कहना है कि यह भी हो सकता है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र यह एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति हो.उनका कहना है कि प्रधानमंत्री बहुत कुछ कहते हैं, लेकिन उनकी बातों पर पार्टी के लोग कहां ध्यान देते हैं? कांग्रेस की तरह बीजेपी ने भी मुसलमानों को समाज से कांट-छांट कर मुख्यधारा से अलग कर दिया. प्रधानमंत्री की मंशा भले ही अच्छी हो, लेकिन कार्रवाई के बिना कोई भी मंशा अधूरी ही मानी जाएगी.चाचा ग़ालिब ने शायद इसी मौके पर कहा होगा. . . कि ख़ुशी से मर नहीं जाते अगर एतबार होता

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