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दलित-मुस्लिम एकता पर पटना में प्रोफेसर रतन लाल के साथ मुस्लिम हस्तियों की अहम मीटिंग,दलित समाज मुसलमानों के खिलाफ हिंसा बंद करे: अशफाक़ रहमान
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दलित-मुस्लिम एकता पर पटना में प्रोफेसर रतन लाल के साथ मुस्लिम हस्तियों की अहम मीटिंग,दलित समाज मुसलमानों के खिलाफ हिंसा बंद करे: अशफाक़ रहमान

Manthan Today
•13 सितंबर 2026 को 02:39 pm बजे•18 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

दलित-मुस्लिम एकता को लेकर फिर से हलचल बढ़ गई है। इसकी शुरुआत बिहार से होने जा रही है, यहां एकता के फॉर्मूले को ज़मीन पर उतारने की पहल तेज़ हो गई है। इसका पूरा रोडमैप तैयार करने और एकता को लागू करने के लिए जानी-मानी हस्तियों ने 12 सितंबर को पटना राजा बाजार में एक अहम मीटिंग की।

Azra

दलित-मुस्लिम एकता को लेकर फिर से हलचल बढ़ गई है। इसकी शुरुआत बिहार से होने जा रही है, यहां एकता के फॉर्मूले को ज़मीन पर उतारने की पहल तेज़ हो गई है। इसका पूरा रोडमैप तैयार करने और एकता को लागू करने के लिए जानी-मानी हस्तियों ने 12 सितंबर को पटना राजा बाजार में एक अहम मीटिंग की।
इस मीटिंग में खास तौर पर दलित विचारक और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर प्रोफेसर रतन लाल भी शामिल हुए। मीटिंग में जाने-माने मुस्लिम नेता अशफ़ाक़ रहमान भी शामिल हुए। उनके अलावा देश भर में मशहूर हस्ती डॉ. अब्दुल हई, बिहार CLP के पूर्व नेता और पूर्व MLA शकील अहमद खान भी मौजूद थे। लंबी बातचीत के बाद मीटिंग में यह तय हुआ कि देश के हालात को देखते हुए दलित-मुस्लिम एकता ज़रूरी है और इसे आगे बढ़ाने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
इस मौक़े पर अशफ़ाक़ रहमान ने कहा कि दलित-मुस्लिम एकता तभी मुमकिन है जब दलित समाज मुसलमानों के खिलाफ हिंसा पूरी तरह से बंद कर दे। अगर उन्हें कोई गुमराह भी कर रहा है तो उन्हें इसे रोकना होगा। अशफ़ाक़ रहमान ने यह भी कहा कि दलित समुदाय अभी भी ब्राह्मणवाद का मोहरा है। वे यह भी भूल गए हैं कि संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को महाराष्ट्र के उनके लोगों ने हराया था ताकि बाबा साहेब संविधान सभा न पहुंच सकें। तब बंगाल के मुसलमानों ने बाबा साहेब को अपने यहां बुलाया और खुलना से जिताकर संविधान सभा भेजा। लेकिन दलित यह भूल गए हैं। अशफाक रहमान ने कहा कि मुसलमानों ने हमेशा एकता की पहल की है।
जिस पर डॉ. हई ने कहा कि कोशिश जारी रहनी चाहिए। सफलता और असफलता अल्लाह के हाथ में है। समस्या का समाधान मिल-बैठकर ही निकलेगा। निराश होने की जरूरत नहीं है। इस स्थिति में जिस तरह से चीजें बिगड़ रही हैं, इस एकता की मजबूती की ज़रूरत है। उन्होंने अशफाक़ रहमान की राय से सहमति जताते हुए कहा कि दलित-मुस्लिम गठबंधन को दिशा देने में आपकी भूमिका अहम हो सकती है।
अशफ़ाक़ रहमान का लंबा पॉलिटिकल अनुभव है और कई मोर्चों पर उनका काम तारीफ़ के क़ाबिल है। शकील अहमद ख़ान ने यह भी कहा कि हम 20 सितंबर को फिर बैठेंगे और पूरी रूपरेखा तैयार करेंगे। हम अभी हर ज़िले का दौरा कर रहे हैं, कॉन्फ्रेंस की जा रही है।
प्रोफ़ेसर रतन लाल ने कहा कि दलित पॉलिटिक्स में अभी भी पूरी तरह से खालीपन है। कर्पूरी ठाकुर और जगजीवन राम के बाद भारतीय पॉलिटिक्स में किसी दलित नेता को बढ़ावा नहीं मिला है। इस पर अशफ़ाक रहमान ने कहा कि दलित पॉलिटिक्स पर रतन लाल का काम बहुत बढ़िया है। उन्हें प्रोजेक्ट करने की ज़रूरत है। साथ ही उन्होंने रतन लाल से कहा कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ दलित हिंसा को कंट्रोल करना होगा और आपको अपने समाज में काम करना चाहिए। दलितों की समस्याएँ कम नहीं हैं। मीटिंग में तय हुआ कि दलित-मुस्लिम गठबंधन पर बातचीत की जा सकती है और इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
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Manthan Today

अनुभवी पत्रकार और लेखक