अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, गठबंधन नहीं तो होगा ' महाभारत ': ओवैसी ने अखिलेश को दिया प्रस्ताव
Manthan Today
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अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा… अब्दुल अपना पॉलिटिकल हक लेगा… अब्दुल अपनी लीडरशिप तय करेगा और अब्दुल लीडर बनेगा। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अपना एजेंडा बिल्कुल साफ कर दिया है
🖋️UZMA
अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, अब्दुल अपना पॉलिटिकल हक लेगा… ये बयान है AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का, जो उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सीधे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को चुनौती दे रहे हैं। ओवैसी यूपी में जमीन तैयार कर रहे हैं और कह रहे हैं—बीजेपी और योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकना है तो विपक्ष को साथ आना होगा, लेकिन मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक समझने की राजनीति अब बंद करनी होगी।”
अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा… अब्दुल अपना पॉलिटिकल हक लेगा… अब्दुल अपनी लीडरशिप तय करेगा और अब्दुल लीडर बनेगा। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अपना एजेंडा बिल्कुल साफ कर दिया है। ओवैसी इन दिनों यूपी के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर रहे हैं । इस दौरान एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में AIMIM प्रमुख ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।
ओवैसी ने कहा कि अगर बीजेपी को रोकना है और योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकना है, तो सभी विपक्षी दलों को साथ आना चाहिए। लेकिन अगर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस साथ नहीं आना चाहतीं, तो ये उनकी मर्जी है। ओवैसी का कहना है कि अब मुस्लिमों को अपनी राजनीतिक संपत्ति समझने की राजनीति बंद करनी होगी। उनका दावा है कि AIMIM मुस्लिमों को सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व देने की बात कर रही है।
यानी ओवैसी का सीधा संदेश है—अब सिर्फ वोट नहीं, हिस्सेदारी चाहिए और हिस्सेदारी भी ऐसी, जिसमें मुस्लिम समाज अपनी राजनीतिक लीडरशिप खुद तय करे।ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के PDA पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और पूछा कि आखिर पार्टी का PDA कहां चला गया? ओवैसी ने कहा कि जिन लोगों पर बीजेपी की B Team होने का आरोप लगाया जाता है, वे सवाल उठाने से पहले अपने फैसलों का जवाब दें।
ओवैसी ने रामगोपाल यादव के परिवार के लंबे समय से राज्यसभा जाने का भी जिक्र किया और सवाल किया कि अगर इस बार एक कारोबारी को राज्यसभा भेजा गया, तो मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व कहां है? क्या मुस्लिमों का काम सिर्फ वोट देना है? ओवैसी का यही सवाल समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक हमला बन गया है।वहीं अखिलेश यादव के अयोध्या जाने या नहीं जाने के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि इस मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए, लेकिन 6 दिसंबर को उत्तर प्रदेश में जो हुआ, वह सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई के मामलों और उस दौर की घटनाओं को सामने रखकर अखिलेश यादव को भी जवाब देना चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल है—क्या ओवैसी यूपी में अकेले चुनाव लड़ेंगे या किसी गठबंधन का हिस्सा बनेंगे?इस पर भी उन्होंने बड़ा संकेत दिया है। ओवैसी ने कहा कि कुछ लोगों के साथ बातचीत चल रही है और गठबंधन को लेकर जल्द तस्वीर साफ की जाएगी। उन्होंने कहा कि AIMIM का मकसद बीजेपी को रोकना है और जो भी उनके साथ आएगा, उसका साथ दिया जाएगा।लेकिन ओवैसी की राजनीति का सबसे बड़ा संदेश फिलहाल यही है—“अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, अब्दुल अपना पॉलिटिकल हक लेगा।”
यानी ओवैसी साफ तौर पर मुस्लिम वोट को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति को चुनौती दे रहे हैं। उनका आरोप है कि दोनों पार्टियां मुस्लिमों का वोट तो चाहती हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी और नेतृत्व नहीं देना चाहतीं।और ये पहली बार नहीं है जब ओवैसी ने अखिलेश यादव को सीधी चेतावनी दी है। इससे पहले उन्होंने बिहार चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करने की बात कहते हुए अखिलेश यादव को आगाह किया था। ओवैसी ने कहा था कि जो गलती अखिलेश कर रहे हैं, वही गलती तेजस्वी यादव ने बिहार में की थी।
उन्होंने यहां तक कहा था कि AIMIM तो पांडवों की तरह सिर्फ पांच गांव मांग रही है। अगर अखिलेश यादव इसके लिए भी तैयार नहीं हैं, तो फिर महाभारत होगा।अब यूपी की सियासत में सवाल यही है—क्या ओवैसी का ये दांव मुस्लिम वोट की राजनीति का समीकरण बदल देगा? क्या समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर दबाव बढ़ेगा? और क्या बीजेपी को रोकने के नाम पर विपक्षी एकता की कोशिश जमीन पर उतर पाएगी?
क्योंकि ओवैसी ने अपना इरादा साफ कर दिया है—अब अब्दुल सिर्फ दरी नहीं बिछाएगा… अपना राजनीतिक हक भी मांगेगा और अपनी लीडरशिप भी तय करेगा।