मंथन डेस्क

PATNA:जनता दल राष्ट्रवादी ने प्रशान्त किशोर के उस दावे का पर्दाफ़ाश करके रख दिया है जिसमें पीके सत्ता की बैटिंग करते हुए उसकी वापसी की पेशनगोई करते फिर रहे हैं.जेडीआर के राष्ट्रीय संयोजक अशफाक़ रहमान से समय मंथन ने इस बाबत सवाल किया कि क्या प्रशान्त किशोर का दावा सत्य है,सत्ता पक्ष का प्रदर्शन 2019 जैसा ही इस बार भी होगा.उन्होंने कहा कि प्रशान्त किशोर एक रणनीतिकार ज़रूर रहे हैं मगर हालिया वर्षों में उनकी भविष्यवाणी बुरी तरह पिट गयी है और मुझे लगता है इस बार भी वह फेल होंगे.

गेम प्लान’के तहत प्रशान्त किशोर का इस्तेमाल

अशफाक़ रहमान का यह भी कहना है कि प्रशान्त किशोर ‘वोटर्स विद्रोह’को समझ नहीं पा रहे हैं.जो वोटर्स कल तक सत्ता पक्ष के साथ खड़े थे वह भी उदासीन है.इसलिए वोटर्स शान्त रूप से अपना मत विरोध में डाल रहे हैं. इस बार सत्ता प्रेम में प्रशान्त किशोर जनता के मूड को नहीं भांप पा रहे.जबकि,वोटर्स विद्रोह की स्तिथि को सत्ता पक्ष भी बख़ूबी भांप चुका है.जिसके नतीजे में प्रशान्त किशोर का इस्तेमाल एक ‘गेम प्लान’के तहत किया जा रहा है.अपनी पार्टी बनाते-बनाते प्रशान्त किशोर सत्ता पक्ष का गुणगान अचानक कैसे करने लगे?सभी चैनलों में उनका प्रमुखता से प्रायोजित इंटर्व्यू चलने की वजह क्या है?उसकी वजह यह हो सकती है कि प्रशान्त किशोर एक रणनीतिकार रहे हैं,वह जो बोलेंगे पब्लिक यक़ीन करेगी.शायद इसी कारण सत्ता पक्ष ने फिर उन्हें हायर कर लिया.

जनता इस बार बदलाव के मूड में है

हालांकि,पिछले चार-पांच वर्षों में प्रशान्त किशोर ने जिस भी पार्टी का क़सीदा पढ़ा और जिसका भी समर्थन किया,चुनाव में उस पार्टी की किश्ती डूब गई है.वोटर्स विद्रोह को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि इस बार भी ऐसे ही कुछ होने वाला है.जब किश्ती डूबने लगती है तो उसको खेवनहार भी नहीं बचा पाता.वह भी नदी के अंदर उठे तूफ़ान का शिकार हो जाता है.प्रशान्त किशोर कोई भी प्रयास कर लें, कोई हरबा अपना लें, वोटर्स विद्रोह को रोक पाना आसान नहीं है. 6 चरणों के चुनाव से प्रतीत होता है कि वोटर्स इस बार बदलाव के मूड में है और प्रशान्त किशोर के लाख हवा बनाने के बावजूद सत्ता पक्ष अपना आख़िरी क़िला ( शेष 2 चरण का मतदान ) ध्वस्त होने से शायद नहीं बचा पाये.

अपनों के बीच से ही क़ायद चुनना चाहिये.

अशफाक़ रहमान कहते हैं कि जो मुसलमान अपनी सियासत और अपनी क़यादत पर इत्तेमाद नहीं करते और प्रशान्त किशोर जैसे को अपना मसीहा मान लेता है उनके लिए भी यह सबक़ है कि बिना परखे दो-चार जज़्बाती वीडियो सुन कर उन पर मोहित नहीं हो जाना चाहिये.अपनी क़यादत और अपनी सियासत को मज़बूत करने केलिए ख़ुद क़ायद बनना चाहिये.अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिये,अपनों के बीच से ही क़ायद चुनना चाहिये.दूसरों ने अभी तक सिर्फ़ वोट की ख़ातिर ठगने का काम किया है.अपनी क़यादत छोड़ कर जिस पर आप भरोसा करना चाहते हैं वह कितने भरोसामंद हो सकता है अचानक सत्ता पक्ष के लिए बैटिंग करते प्रशान्त किशोर के मिनटों में बदलते विचारधारा को देख सकते हैं.

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