दलित‑मुस्लिम एकता समय की आवश्यकता: अशफ़ाक़ रहमान 22 नवंबर को पटना में राज्य स्तरीय दलित‑मुस्लिम सम्मेलन
Manthan Today
••43 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
दलित- मुस्लिम एकता की बात दशकों से चल रही है लेकिन अब इस पर शिद्दत से काम करने की ज़रूरत महसूस किया जाने लगा है.इसी कड़ी में रविवार(20 सितम्बर,2026)को राजा बाज़ार पटना में दलित-मुस्लिम एकता मंच ,बिहार की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रसिद्ध सर्जन डॉ.अब्दुल हई की अध्यक्षता में हुई.प्रमुख एजेंडा था-‘साथ बैठें,साथ मिलें,साथ खायें’और दलित-मुस्लिम मिलकर एकता को आगे बढ़ायें
🖋️एस अनवर
दलित‑मुस्लिम एकता की बात दशकों से चल रही है लेकिन अब इस पर शिद्दत से काम करने की ज़रूरत महसूस की जाने लगी है। इसी कड़ी में रविवार (20 सितम्बर,2026) को राजा बाज़ार, पटना में दलित‑मुस्लिम एकता मंच, बिहार की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रसिद्ध सर्जन डॉ. अब्दुल हई की अध्यक्षता में हुई। प्रमुख एजेंडा था — ‘साथ बैठें, साथ मिलें, साथ खाएँ’ और दलित‑मुस्लिम मिलकर एकता को आगे बढ़ाएँ।
बिहार के क़द्दावर मुस्लिम रहनुमा अशफ़ाक़ रहमान ने अपने संबोधन में कहा कि दलित‑मुस्लिम एकता वक़्त की पुकार है और सभी लोगों की राय से हम सहमत हैं। लेकिन हमारा मानना है कि कोई भी एकता तभी सफल हो सकती है जब खुली मानसिकता के साथ हम तैयार न हों। दलित चाहें वज़ीर बन जाएँ या वज़ीर‑ए‑आला अपने अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। मुसलमान को तो छोड़ ही दीजिए, अपने समाज के लिए भी कुछ नहीं कर पाते। कॉलेजियम सिस्टम जिसका उल्लेख मूल संविधान में नहीं है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से विकसित हुई है, के विरुद्ध आवाज़ नहीं उठा पाते हैं। ग्राउंड लेवल पर चाहे बहकावे में ही दलितों को मुसलमानों के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया गया है। जबकि फ़ॉर्वर्ड ब्लॉक की हिंसा के शिकार मुसलमान और दलित दोनों हो रहे हैं। मुसलमानों की भीड़ लिंचिंग हो रही है तो दलितों की भी हो रही है। मुसलमान जितनी मज़बूती से बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा से लड़ रहे हैं, दलित बीजेपी और आरएसएस के ख़िलाफ़ नहीं हैं। दलितों के टॉप नेता या तो बीजेपी में हैं या उसके गठबंधन वाली पार्टियों में।
अशफ़ाक़ रहमान ने कहा कि दलित और मुसलमान दोनों आज की तारीख़ में शोषित हैं। शोषण के ख़िलाफ़ दोनों को एक साथ लड़ना होगा, एक मंच पर एक साथ आना होगा। हम अपनी गलती को उजागर करें, आप अपनी गलती को उजागर कर तब ही एकता बन पाएगी। 1950 में राष्ट्रपति आदेश से धारा 341 को प्रतिबंधित कर दिया गया और मुसलमानों को सैंकड़ों सीटों पर चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया गया, अम्बेडकर साहब ने आवाज़ नहीं उठाई। जबकि महाराष्ट्र में चुनाव हारने के बाद बंगाल बुला कर मुसलमानों ने उन्हें जीता कर संविधान सभा भेजा था। हमने हमेशा एकता की पहल की है। अशफ़ाक़ रहमान ने यह भी कहा कि मुसलमानों की तरफ़ से ज़ुल्म की कभी भी शिकायत नहीं मिलती है। मुसलमान सामाजिक बर्बरता नहीं करते। मिल बैठ कर ही मसले का हल निकालेंगे। शुरुआत होनी चाहिए।
डॉक्टर हई ने कहा कि देश के मौजूदा नफ़रती माहौल में दलित‑मुस्लिम एकता को आगे बढ़ाना अनिवार्य हो गया है। शकील अहमद खान ने कहा कि समुदायों का गठबंधन से ज़्यादा ज़रूरी नागरिकों की बंधुता है। जब शहरी भाई की तरह रहेंगे तो समुदाय भी एकजुट रहेगा। गठबंधन को तीन प्रमुख बिंदु पर फ़ोकस किया गया है: समानता, बंधुता और संवैधानिक नागरिकता। 22 नवम्बर को पटना में एक राज्य स्तरीय दलित‑मुस्लिम सम्मेलन बुलाने का निर्णय लिया गया है। इस बैठक में कांग्रेस नेता शकील अहमद ख़ान, अमर आज़ाद, त्रिलोकी मांझी, अजय पासवान, संजय बाल्मिकी, शौकत अली रिज़वी आदि उपस्थित थे।