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दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर नहीं रहे,75 साल की उम्र में निधन

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बॉलाीवुड इंडस्ट्री से बेहद दुखद खबर आ रही है। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और अपनी कड़क आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर का निधन हो गया है। उन्होंने 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है।दिग्गज अभिनेता की मौत से बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है।फैंस और तमाम सेलेब्स एक्टर की अचानक मौत से सदमे में हैं और सोशल मीडिया पर शोक जता रहे हैं।

बॉलाीवुड इंडस्ट्री से बेहद दुखद खबर आ रही है। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और अपनी कड़क आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर (Nana Patekar) का निधन हो गया है। उन्होंने 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है।

उनकी मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया है।वे 75 साल के थे. दिग्गज अभिनेता की मौत से बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है।फैंस और तमाम सेलेब्स एक्टर की अचानक मौत से सदमे में हैं और सोशल मीडिया पर शोक जता रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर हार्ट अटैक आया था। उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। उनके निधन के बाद मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।

'परिंदा' में विलेन बने, 3 नेशनल अवॉर्ड जीता

1989 की फिल्म 'परिंदा' में नाना पाटेकर ने अन्ना का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 1994 की 'क्रांतिवीर' के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला।

1996 की 'अग्निसाक्षी' के लिए भी उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस तरह उन्हें करियर में 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए नाना पाटेकर को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों में भी काम किया।

सालों तक अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को मनोरंजन करने वाले नाना पाटेकर ने 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्नि साक्षी', 'अबतक छप्पन', 'राजनीति' और 'वेलकम' जैसी कालजयी फिल्मों के जरिए हिंदी और मराठी सिनेमा में एक अमिट छाप छोड़ी है। सिर्फ एक अभिनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि 'नाम फाउंडेशन' के जरिए महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों की मदद करने वाले एक मसीहा के रूप में भी उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।

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