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Manthan Today
Politics

MLC चुनाव ने खोली JDU की अंदरूनी राजनीति ?

By Manthan Today4 min read

बिहार में MLC चुनाव का माहौल जैसे-जैसे गरम हो रहा है, वैसे-वैसे JDU के अंदर की राजनीतिक हलचल भी चर्चा में आ गई है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच सामने आई खींचतान अब सिर्फ दो नेताओं के बीच का विवाद नहीं रह गई है।

🖋️उज़मा

बिहार में MLC चुनाव की सरगर्मी के बीच JDU के अंदर की सियासत भी गरमाती नजर आ रही है। मामला सिर्फ अनंत सिंह और नीरज कुमार की खींचतान का नहीं है... क्योंकि एक तरफ अनंत सिंह के साथ ललन सिंह खड़े दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ नीरज कुमार के साथ निशांत कुमार की मौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर JDU में ये किस तरह के नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं?

बिहार में MLC चुनाव का माहौल जैसे-जैसे गरम हो रहा है, वैसे-वैसे JDU के अंदर की राजनीतिक हलचल भी चर्चा में आ गई है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच सामने आई खींचतान अब सिर्फ दो नेताओं के बीच का विवाद नहीं रह गई है। इस पूरे मामले में जिस तरह पार्टी के प्रभावशाली चेहरों की अलग-अलग पोजिशनिंग दिखाई दे रही है, उसने JDU की अंदरूनी सियासत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक तरफ केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को अनंत सिंह के पक्ष के साथ खड़ा देखा जा रहा है। ललन सिंह और अनंत सिंह के पुराने राजनीतिक समीकरण किसी से छिपे नहीं हैं। ऐसे में जब अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सामने आया, तो ललन सिंह की भूमिका पर भी सबकी नजर टिक गई। अनंत सिंह की तरफ से उठाए गए मुद्दों और शिकायतों को लेकर ललन सिंह की सक्रियता ने यह संकेत जरूर दिया कि अनंत सिंह इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।लेकिन कहानी का दूसरा पक्ष भी उतना ही दिलचस्प है। नीरज कुमार को उस वक्त राजनीतिक समर्थन मिलता दिखाई दिया, जब निशांत कुमार उनके पक्ष में नजर आए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का किसी राजनीतिक चेहरे के साथ खड़ा होना अपने आप में चर्चा का विषय बन जाता है। खासकर तब, जब मामला JDU के एक वरिष्ठ नेता और सीधे MLC चुनाव से जुड़ा हो।

यानी तस्वीर कुछ ऐसी बन रही है—एक तरफ अनंत सिंह और उनके साथ ललन सिंह, तो दूसरी तरफ नीरज कुमार और उनके साथ निशांत कुमार। अब सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ नेताओं का व्यक्तिगत समर्थन है या फिर JDU के भीतर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण भी आकार ले रहे हैं?हालांकि इस आधार पर सीधे JDU में गुटबाजी कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि MLC चुनाव ने पार्टी के भीतर मौजूद कई राजनीतिक रिश्तों और समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। क्योंकि पटना स्नातक सीट का चुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं है। इस सीट पर उम्मीदवारों के साथ-साथ उनके पीछे खड़े नेताओं की ताकत भी देखी जा रही है।

अनंत सिंह का बिहार की राजनीति में अपना प्रभाव रहा है। वहीं नीरज कुमार लंबे समय से JDU की राजनीति का हिस्सा हैं और पार्टी के महत्वपूर्ण चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे में दोनों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ना और फिर दोनों के साथ अलग-अलग प्रभावशाली चेहरों की मौजूदगी, इस पूरे मुकाबले को और दिलचस्प बना देती है।अब यहां एक और सवाल है—क्या MLC चुनाव ने JDU के अंदर की पुरानी राजनीतिक केमिस्ट्री को बदलने का मौका दे दिया है? क्या नेताओं के समर्थन से यह तय होगा कि पार्टी के भीतर किस चेहरे का राजनीतिक प्रभाव ज्यादा है? या फिर चुनाव के नतीजे ही बताएंगे कि जमीन पर किस खेमे की पकड़ मजबूत है?

क्योंकि बिहार की राजनीति में सिर्फ मंच पर दिए गए बयान ही मायने नहीं रखते। किस नेता के साथ कौन खड़ा है, किसके समर्थन में कौन सामने आता है और चुनाव के वक्त किसका नेटवर्क कितना काम करता है... ये सब भी राजनीतिक ताकत का संकेत माना जाता है।फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। इसे सीधे तौर पर JDU की औपचारिक गुटबाजी कहना ठीक नहीं होगा। लेकिन अनंत सिंह के साथ ललन सिंह की नजदीकी और नीरज कुमार के साथ निशांत कुमार की मौजूदगी ने सियासी चर्चा जरूर तेज कर दी है।

अब असली परीक्षा चुनावी मैदान में होगी। सवाल यही है—क्या ललन सिंह का समर्थन अनंत सिंह के खेमे को मजबूती देगा? क्या निशांत कुमार की मौजूदगी नीरज कुमार के लिए राजनीतिक ताकत साबित होगी? और सबसे बड़ा सवाल... क्या MLC चुनाव का नतीजा JDU के अंदर किसकी पकड़ मजबूत है, इसका भी संकेत देगा?फिलहाल चुनाव बाकी है, लेकिन मुकाबले से पहले ही JDU की अंदरूनी सियासत सुर्खियों में आ चुकी है। अब नजर सिर्फ पटना स्नातक सीट के नतीजे पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी होगी कि इस पूरे विवाद के बाद JDU के भीतर राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।