राजनीति बड़ी ज़ालिम चीज़ होती है.उगते सूरज को लोग यहां पूजा करते हैं.अब देखिए!पूर्व विधायक अभय कुशवाहा ने कैसे चाल बदल ली है.पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के खासमख़ास थे.ऐसा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की तस्वीर लगाना भी नागवार गुज़रता था.

सेराज अनवर

GAYA:राजनीति बड़ी ज़ालिम चीज़ होती है.उगते सूरज को लोग यहां पूजा करते हैं.अब देखिए!पूर्व विधायक अभय कुशवाहा ने कैसे अपनी चाल बदल ली है.पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के खासमख़ास थे.ऐसा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की तस्वीर लगाना भी नागवार गुज़रता था.इस पर ख़ूब बवाल भी हुआ.अब वही अभय कुशवाहा ने रामचन्द्र सिंह का मुकम्मल साथ छोड़ दिया है और ललन सिंह के आगे-पीछे करने लगे हैं. अभय कुशवाहा जहानाबाद में ललन सिंह के साथ देखे गये.दिलचस्प बात यह है कि अभय कुशवाहा से छत्तीस का रिश्ता रखने वाले राजू बरनवाल क़रीब-क़रीब दिखे.

पार्टी नेता को श्रद्धांजलि देने आये थे ललन सिंह

ललन सिंह 30 जुलाई को पार्टी के पूर्व अध्यक्ष चंदेश्वर बिंद के निधन पर श्रधांजलि अर्पित करने जहानाबाद आए थे.इससे पूर्व 24 जुलाई को पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह भी बिंद के गांव मातमपूर्सी केलिए पहुंचे थे.जहां उनका जोरदार तरीके से स्वागत हुआ था. बड़ी बात ये थी कि यहां एक नारा लगा था कि बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो आरसीपी सिंह जैसा हो.अभय कुशवाहा ने आरसीपी के इस कार्यक्रम से दूरी बना ली थी.लेकिन जैसे ही ललन सिंह यहां पहुंचने की उन्हें ख़बर लगी जहानाबाद में समर्थकों के साथ कैम्प कर गये.

ललन सिंह को अंग-वस्त्र देकर सम्मानित करते राजू बरनवाल,अभय कुशवाहा भी देखे जा सकते हैं

अभय कुशवाहा अब ललन के पाले में

जदयू के अंदर ललन सिंह और आरसीपी सिंह के बीच शह और मात का खेल जारी है. ऐसा लग रहा है कि ललन सिंह ने आरसीपी सिंह के राइट हैंड कहे जाने वाले पूर्व विधायक अभय कुशवाहा को अपने पाले में कर लिया है. कुशवाहा का ललन सिंह के पक्ष में आना आरसीपी खेमे के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है. बता दें कि आरसीपी सिंह ने केंद्रीय मंत्री बनने पर अभय कुशवाहा को अपने विभाग में एडजस्ट किया था. मंत्रिमंडल से हटते ही कुशवाहा ने भी आरसीपी से नाता तोड़ लिया है. अभय कुशवाहा अब आरसीपी की गुणगान गाने की बजाय पार्टी और नीति की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नेता के नेतृत्व में विश्वास करते हैं. हमारी पार्टी की नीति और सिद्धांत जो है हम उसकी विचारधारा पर चलते हैं.दिलचस्प बात यह है कि ललन सिंह का जहानाबाद आगमन पहले अभय कुशवाहा कार्यकर्ताओं के साथ उनके पक्ष में फील्डिंग सजाने में लग गए थे.

आरसीपी सिंह जहानाबाद में जिसमें अभय कुशवाहा साथ नहीं हैं

बरनवाल से फिर छिड़ सकती है जंग

यह जगज़ाहिर है आरसीपी के दौर में अभय कुशवाहा का गया की राजनीति में तूती बोलती थी.उन्होंने मनमाने तरीक़े से संगठन चलाया.पार्टी के सभी प्रमुख पदों पर अपने लोगों को बिठाया.वर्षों से गया महानगर के जिला अध्यक्ष रहे राजू बरनवाल की छुट्टी कर दी.पराजय के डर से घोषणा के बावजूद राजू बरनवाल नामांकन नहीं कर सके थे.नतीजा यह हुआ कि काफी सक्रीय रहने वाले राजू बरनवाल अचानक सुस्त पड़ गये.जब आरसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से छुट्टी हुई तो राजू बरनवाल की जान में जान आयी.इस दौरान अभय कुशवाहा भी राजनीतिक हाशिये पर आ गये.जोड़तोड़ कर राजू बरनवाल फिर महानगर अध्यक्ष पद पर क़ाबिज़ हो गये.मगर अभय कुशवाहा के पाला बदल लेने से राजू बरनवाल की मुश्किलें पुनः बढ़ सकती हैं.लॉबिंग में माहिर कुशवाहा ने ललन सिंह का दिल जीत लिया तो गया की राजनीति में उनका दबदबा फिर बढ़ सकता है.राजू बरनवाल की पार्टी में मज़बूत कड़ी दादा हैं.यानी वशिष्ठ नारायण सिंह जो अभी बीमार चल रहे हैं.राजू बरनवाल भी जहानाबाद में मौजूद थे.उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय-अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ़ ललन सिंह को अंग-वस्त्र देकर सम्मानित भी किया.उस वक़्त कुशवाहा उनके बेहद क़रीब थे.मगर दोनों की नज़र नहीं मिली.मतलब खेला अभी ख़त्म नहीं हुआ है.

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