यदि अरब देशों में अडानी और अम्बानी के व्यावसायिक हित की चोट नहीं पहुंचती तो नूपुर पर कार्रवाई भी नहीं होती.भारत के मुसलमान कई दिनों से एहतज़ाज कर रहे थे कहां सरकार सचेत हुई?क्या यह मान लिया जाये विदेश से जब दबाव बनेगा,भद्द पिटेगी तो होश सत्ता और संगठन होश में आयेंगे?

मंथन डेस्क

PATNA:उसे अविलम्ब गिरफ़्तार करने की मांग की है.पार्टी ने कहा है कि जितना देर होगी आक्रोश बढ़ेगा.नूपुर के प्रति शासन-प्रशासन की हमदर्दी समझ के परे है.जेडीआर के राष्ट्रीय संयोजक अशफाक़ रहमान कहते हैं कि उन ख़बरिया चैनलों पर भी सख़्त बंदिश लगाने की भी मांग की है जो जनसरोकार के मुद्दे को छोड़ दिन-रात हिन्दू-मुस्लिम में नफ़रत पैदा करने के साथ धार्मिक भावनाओं को आहत करने में जुटे हैं.इससे भारत की छवि विश्व में ख़राब हो रही है.न्यूज़ चैनल धार्मिक बहस को हवा देकर आग लगाने का काम कर रहे हैं.

अशफाक़ रहमान का कहना है कि भारत का मुसलमान जब राष्ट्रपिता बापू का अपमान बर्दाश्त नहीं करता तो फिर अपने पैग़म्बर का अपमान कैसे बर्दाश्त करेगा.वह कहते हैं कि धार्मिक उन्माद का यह गुब्बार एक दिन भारत को भारी नुक़सान पहुंचायेगा,पहुंचा रहा है.और इसमें समाचार चैनल ख़तरनाक भूमिका निभा रहा है.बिना इन चैनलों पर कार्रवाई किये इसे रोका नहीं जा सकता है.सबसे पहले चैनलों पर बंदिश लगाने की जरूरत है,सब कुछ ख़ुद ठीक हो जायेगा.

1921 में आरएसएस के गठन के साथ कटुता की जो आंधी चली वह थमने का नाम नहीं ले रही.देश धार्मिक उन्माद के सहारे कभी नहीं चलता.चंद दिनों में विश्व स्तर पर हुई बदनामी से यह बात साबित हो गयी है.मोदी सरकार को चाहिए अब भी ज़हरीले बोल वाले लोगों पर सख़्त कार्रवाई करे.चैनलों पर धार्मिक बहस पर प्रतिबंध लगा ही देना चाहिये.जब धर्म पर बहस नहीं होगी तो मुद्दों पर लोग आ जायेंगे.बहस के लिए बेरोज़गारी,महंगाई,शिक्षा,स्वास्थ्य तो है ही.लेकिन चैनल वाले ग़ैरज़रूरी बहस में जनता की उलझा कर गम्भीर मुद्दों से भटकाना चाहते हैं और सारा चैनल किसके हाथ में है यह बताने की जरूरत है?यदि अरब देशों में अडानी और अम्बानी के व्यावसायिक हित की चोट नहीं पहुंचती तो नूपुर पर कार्रवाई भी नहीं होती.भारत के मुसलमान कई दिनों से एहतज़ाज कर रहे थे कहां सरकार सचेत हुई?क्या यह मान लिया जाये विदेश से जब दबाव बनेगा,भद्द पिटेगी तो होश सत्ता और संगठन होश में आयेंगे?

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