मौलाना इमरान ने मौलाना महमूद मदनी को सख़्त लफ़्ज़ों में कहा है कि बेहतर होगा कि आप मस्जिदों, मदरसों और मंदिरों के बारे में बयानबाजी करने से परहेज करें, क्योंकि आप जैसे लोग कभी इस्लाम के रक्षक नहीं हो सकते और न ही कभी थे!

मंथन डेस्क

PATNA:मदरसों पर मौलाना महमूद मदनी के दिये गये एक बयान पर ऑल मदरसा युवा शिक्षक संघ काफी खफ़ा है.संघ के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना इमरान आलम ने उक्त बयान की घोर निंदा की है.जिसमें मौलाना महमूद मदनी ने एक राष्ट्रीय चैनल की डिबेट में सहायता प्राप्त मदरसों के बारे में आपत्तिजनक बयान दिया है.मौलाना इमरान का कहना है कि महमूद मदनी ने मदरसों के बारे में ग़ैरजिम्मेदाराना बयान दिया है.वह बेहद निंदनीय है और भारत के संविधान का घोर उल्लंघन है.क्योंकि संविधान ने बिना किसी भेदभाव के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान खोलने और चलाने का सरकार का पूर्ण अधिकार दिया है.

मौलाना इमरान ने कहा है कि निश्चित रूप से ऐसी मानसिकता वाले लोगों से भारत की आजादी से लेकर अब तक मुसलमानों को नुक़सान ही उठाना पड़ा है. वह पूछते हैं कि आखिर मुसलमानों के बारे में एकतरफ़ा निर्णय लेने वाले मदनी होते कौन हैं?क्या उन्हें वह दिन याद नहीं है?जब कोरोना काल में एक मौलाना साद की वजह से भारत के मुसलमान कितने परेशान हुए? न ही उन्होंने कोई सफाई दी. जबकि सबसे पहले बरेली खानकाह के मौलाना तौकीर रजा खान ने बार-बार मौलाना शाद से इस मामले में अपना बयान जारी करने के लिए कहा लेकिन वह अपने फार्महाउस में मुसलमानों के हालात से बेख़बर गहरी नींद में थे और शायद मौलाना महमूद मदनी भी गहरी नींद में ही थे. जिन्होंने सच्चाई सामने लाने के लिए मौलाना साद पर दबाव नहीं बनाया.

मौलाना इमरान ने मौलाना महमूद मदनी को सख़्त लफ़्ज़ों में कहा है कि बेहतर होगा कि आप मस्जिदों, मदरसों और मंदिरों के बारे में बयानबाजी करने से परहेज करें, क्योंकि आप जैसे लोग कभी इस्लाम के रक्षक नहीं हो सकते और न ही कभी थे! आप जैसे लोगों का बहुत उदाहरण मौजूद है.बिहार के इतिहास में भी आप जैसे लोगों ने एक इंक़लाबी नारा दीन बचाओ-देश बचाओ के नाम पर पटना के गांधी मैदान में मुसलमानों की ज़मीर का सौदा किया.इसलिए सस्ती बयानबाज़ी से मदनी साहब को व्यक्तिगत लाभ हो सकता है क़ौम का नहीं!

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