ˈगॉसिप् मीडिया के मुताबिक़ इस मौक़े पर अमित शाह बिहार में भाजपा के मुख्यमंत्री के नाम का भी चयन करेंगे.बिहार में मुख्यमंत्री बदलने का शोर बहुत तेज़ है.राजनीतिक हलचल के बीच नीतीश कुमार ने राजद की दावत(इफ़्तार)क़ुबूल कर अपनी ओर से पहल कर दी है.

सेराज अनवर

कई तरह के सियासी अटकलों के बीच नीतीश कुमार प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बुलावे पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित इफ़्तार पार्टी में पहुंचे तो ज़रूर कोई बात है.आज ही राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को ज़मानत मिली है.कल गृह मंत्री अमित शाह वीर कुंवर सिंह जयंती में शामिल होने बिहार आ रहे हैं. ˈगॉसिप् मीडिया के मुताबिक़ इस मौक़े पर अमित शाह बिहार में भाजपा के मुख्यमंत्री के नाम का भी चयन करेंगे.बिहार में मुख्यमंत्री बदलने का शोर बहुत तेज़ है.राजनीतिक हलचल के बीच नीतीश कुमार ने राजद की दावत(इफ़्तार)क़ुबूल कर अपनी ओर से पहल कर दी है.

नीतीश दिल से सेक्यूलर हैं.सत्ता की मजबूरी भाजपा के साथ गलबहियां पर मजबूर करती है.एक बार भाजपा को छोड़ कर आज़माया भी.मुसलमानों का साथ नहीं मिला.
अब जबकि,उनकी मर्ज़ी के विरुद्ध बिहार छोड़ने की विवशता बन रही है तो भाजपा की मर्ज़ी के विरुद्ध फिर एक बार विपक्ष की इफ़्तार पार्टी में शामिल हो कर नीतीश ने राजद के प्रति नरमी का संकेत और संदेश दोनों दिया है.नीतीश दिल से नहीं चाहते कि मुख्यमंत्री छोड़ने की हालत में सत्ता भाजपा के हाथ में चली जाये.दावत ए इफ़्तार में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री को कितना दिल पर पत्थर रखना पड़ा होगा,कोई उनसे पूछे.

अब गेंद तेजस्वी के नेट में है.’मुख्यमंत्री’पर मामला अटक सकता है.राबड़ी देवी और राजद कार्यकर्ता की इच्छा है कि तेजस्वी को ही मुख्यमंत्री होना चाहिए.2015 के महागठबंधन सरकार से अलग होने के बाद राजद और जदयू की सरकार बनाने की पहल हुई थी.मगर मुख्यमंत्री पर ही मामला अटक गया था और नीतीश कुमार को मजबूरी में भाजपा के साथ ही रहना पड़ा.तब राबड़ी देवी ने वीटो कर दिया था.वह तेजस्वी को ही मुख्यमंत्री देखना चाहती थीं.उस वक्त एक ग़ैर सियासी रणनीतिकार और विधान परिषद के उच्च पद पर रहे शख़्स के प्रयास के बावजूद मुहिम सफल नहीं हो पायी थी.तीखे और कड़ूवाहट भरे रिश्ते के बावजूद तेजस्वी ने नीतीश कुमार को इफ़्तार में आमंत्रित किया तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की सहमति जरूर होगी?

राजद को चाहिए कि मुख्यमंत्री पद को प्रतिष्ठा या प्रतिशोध का विषय न बनाये.यदि सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिकता पार्टी का अहम एजेंडा है तो बिना शर्त नीतीश को क़ुबूल करे.बिहार को भाजपा के हाथ में जाने से बचाये.तेजस्वी अभी युवा हैं.राजनीति में लम्बा सफ़र तय करना है.2025 तक नीतीश की रहनुमाई में रहें,फिर नीतीश खुद ही ख़ुशी-ख़ुशी तेजस्वी को सत्ता हस्तांतरण कर देंगे.दो दशक सत्ता में रहना कम थोड़ी होता है.नीतीश की सिर्फ एक ही ख्वाहिश है तरक़्क़ी याफ़्ता बिहार.तब तेजस्वी को नेतृत्व सौंपते शायद सबसे अधिक ख़ुशी होगी.यदि कुर्सी के चक्कर में राजद दूरगामी राजनीति से चूक जाता है और मुख्यमंत्री भाजपा का बनता है तो इसके लिए राजद दोषी होगा?आज का संदेश यही है.

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