शिक्षा विभाग की शुरू से आदत रही है कि जहां शिक्षकों के फ़ायदे की बात होती है उसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है और शिक्षक कोर्ट और बोर्ड का चक्कर लगाते रहते हैं.संघ ने मांग की है कि शिक्षा मंत्री अपनी पीठ थपथपाने की बजाय निमावली की ख़ामियों को जल्द दूर करें.

पटना/मंथन डेस्क

नियमावली बनने से मदरसा शिक्षा में गुणात्मक सुधार के शिक्षा मंत्री के दावे को ऑल मदरसा शिक्षक युवा संघ ने फ़रेब बता ख़ारिज कर दिया है.संघ के मीडिया प्रभारी मौलाना अहमद रज़ा ने शुक्रवार को यहां कहा कि मदरसा नियमावली में बहुत सारी ख़ामियां और कमियां हैं.इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है.इससे मदारिस इस्लामिया के नेजाम की नुक़सान पहुंचेगा.

मौलाना अहमद रज़ा ने बताया कि पत्र संख्या 395 के मुताबिक़ कहा गया है कि मदरसा शिक्षकों के पक्ष में नियम और शर्त बनाये गये हैं,जिससे उन्हें फ़ायदा पहुंचेगा और शिक्षकों का एक पद से दूसरे पद पर प्रोन्नति हो सकेगी लेकिन इस नियमावली में व्यक्तिगत लाभ की बात नहीं कही गयी है.अनुकंपा की चर्चा भी नहीं है.जबकि अनुकंपा पहले से लागु रहा है.संघ का कहना है कि यदि किसी शिक्षक के साथ कोई हादसा पेश आ जाता है और उसे अनुकम्पा की जरूरत पड़ती है तो वह कहां और किसके पास वह जायेगा?जबकि नए नियमावली में इसका ज़िक्र तक नहीं है.

अहमद रज़ा सवाल उठाते हैं कि अगर हाफ़िज़ का मौलवी होना ज़रूरी है तो उसका पे स्केल मौलवी का होगा?यहां भी मामला साफ नहीं है.अगर कोई पहले से हाफ़िज़ के ओहदे पर बहाल है तो नए नियमावली के तहत उसको मौलवी का पे स्केल दिया जायेगा?यह भी क्लीयर नहीं है.नए नियमावली पढ़ कर यही समझ में आ रहा है कि हड़बड़ी में इसे लागु किया गया है.शिक्षा विभाग की शुरू से आदत रही है कि जहां शिक्षकों के फ़ायदे की बात होती है उसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है और शिक्षक कोर्ट और बोर्ड का चक्कर लगाते रहते हैं.संघ ने मांग की है कि शिक्षा मंत्री अपनी पीठ थपथपाने की बजाय निमावली की ख़ामियों को जल्द दूर करें.

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