बिहारशरीफ / डॉ अरुण कुमार मयंक

नालन्दा जिला में भाकपा (माले) ने बिहारशरीफ कार्यालय में आदिवासियों के हक-हकूक के लिए लड़ने वाले 84 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की कल कस्टडी में हुई मौत से उपजे आक्रोश व असीम दुख में झारखण्ड व पूरे भारत की गरीब एवं दमित जनता के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई

84 साल के फादर स्टेन 8 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किये जाने के बाद तलोजा सेंट्रल जेल महाराष्ट्र में कैद थे. वह पार्किंसन रोग सहित कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे.


इस अवसर पर माले कार्यकर्ताओँ ने दिवंगत आत्मा की शांति हेतु दो मिनट का मौन रखा. माले के बिहारशरीफ व रहुई प्रभारी पाल बिहारी लाल ने कहा कि फादर स्टेन स्वामी ने भीमा कोरेगांव के फर्जी केस में जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा फंसाए जाने और गिरफ्तार किए जाने से पहले आदिवासियों और दलितों के अधिकारों के लिए काम करते हुए कई दशक बिताए थे. 84 साल के फादर स्टेन 8 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किये जाने के बाद तलोजा सेंट्रल जेल महाराष्ट्र में कैद थे. वह पार्किंसन रोग सहित कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे. उन पर कठोर यूएपीए कानून के तहत फर्जी मुकदमा कर फंसाने का एक ही परिणाम था कि उनकी जमानत अर्जी अनिवार्य रूप से खारिज कर दी गई थी.

तलोजा सेंट्रल जेल के अधिकारियों ने उन्हें पानी पीने हेतु एक सिपर मुहैया कराने में एक महीने से ज्यादा का वक्त लिया और उनकी गंभीर बीमारियों को अनदेखा कर उनके स्वास्थ्य में आ रही गिरावट को सुनिश्चित कर दिया.


ठेला फुटपाथ वेंडर्स यूनियन के जिला सचिव रामदेव चौधरी ने कहा कि पहले से ही कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे फादर स्टेन की स्थिति कैद और जेल की अमानवीय परिस्थितियों से और भी खराब हो गई और वे कोरोना से भी संक्रमित हो गए. वे पार्किंसन बीमारी के कारण पानी पीने के लिए ग्लास भी नहीं थाम सकते थे. तलोजा सेंट्रल जेल के अधिकारियों ने उन्हें पानी पीने हेतु एक सिपर मुहैया कराने में एक महीने से ज्यादा का वक्त लिया और उनकी गंभीर बीमारियों को अनदेखा कर उनके स्वास्थ्य में आ रही गिरावट को सुनिश्चित कर दिया.
चौधरी ने आगे कहा कि अब फादर स्टेन नहीं रहे. भीमा कोरेगांव मामले को मोदी-शाह सरकार द्वारा किसी भी असहमति की आवाज को जेल में बंद करने के औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. क्रिमिनल लॉ और जांच एजेंसियों की मशीनरी को किसी भी राजनीतिक असंतोष को दबाने का हथियार बना दिया गया है. यूएपीए कानून के तहत बेल नही जेल का प्रावधान ‘रूल ऑफ लॉ’ के बुनियादी सिद्धांतों को खत्म कर देता है.

फादर स्टेन की जमानत की सुनवाई ने भारतीय न्याय व्यवस्था में गिरावट के नये प्रतिमान दर्ज कर दिये हैं जो आगामी इतिहास में दर्ज रहेगा..!


माले नेताओं ने कहा कि फादर स्टेन की जमानत की सुनवाई ने भारतीय न्याय व्यवस्था में गिरावट के नये प्रतिमान दर्ज कर दिये हैं जो आगामी इतिहास में दर्ज रहेगा..! यूएपीए सहित सभी काले व कठोर कानूनों को रद्द करने और वर्तमान बहुसंख्यकवादी केंद्र सरकार द्वारा प्रताड़ित और जेल में बंद सभी मानवाधिकार अधिवक्ताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए संघर्ष के साथ भारत में राज कर रहे फासीवादियों के हमलों के खिलाफ पूरी दृढ़ता व साहस से खड़े रहने के अपने संकल्प को दोहराते हुए हम फादर स्टेन स्वामी को अपनी श्रद्धांजलि देते हैं.
इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में सफाईकर्मियों के नेता मनोज रविदास, विक्की कुमार, करण सिंह, महेश रविदास व आकाश मलिक आदि उपस्थित थे.

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