अमीर ए शरीयत का चुनाव क़रीब आते ही मंजरनामा तेज़ी से बदलने लगा है.अभी तक आगे चल रहे अहमद वली फैसल रहमानी को कड़ी टक्कर मिलने वाली है.हो सकता है सर्वसम्मति के आधार पर मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी आगे निकल जायें और फैसल रहमानी पिछड़ जायें.

पटना/सेराज अनवर

अमीर ए शरीयत का चुनाव क़रीब आते ही मंजरनामा तेज़ी से बदलने लगा है.अभी तक आगे चल रहे अहमद वली फैसल रहमानी को कड़ी टक्कर मिलने वाली है.हो सकता है सर्वसम्मति के आधार पर मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी आगे निकल जायें और फैसल रहमानी पिछड़ जायें.अभी तक अमीर ए शरीयत की उम्मीदवारी से रज़ामंद नहीं दिखने वाले मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी पटना पहुंच गये हैं.हालांकि,वह एक शादी में शिरकत के लिए बिहार आये हैं.इस दौरान कल इमारत ए शरिया भी गये और आज पटना के एक कार्यक्रम में शामिल हुए.राजधानी के एग्जिबिशन रोड स्थित मस्जिद अब्दुल हई में आयोजित एक धार्मिक मजलिस(दर्स ए क़ुरान)के समापन के बाद उनसे गुज़ारिस की गयी कि अमीर ए शरीयत के चुनाव को लेकर क़ौम में बेचैनी है.सबकी राय है कि अमीर ए शरीयत आपसे बेहतर कोई नहीं है.इसलिए अमीर ए शरीयत की पेशकश को आप क़ुबूल कर लें,ताकि इमारत ए शरिया में दराड़ पड़ने से रोक जा सके.पहले तो उन्होंने इंकार किया लेकिन लोगों की गुज़ारिश पर यह कह कर तैयार हुए कि यदि उनके नाम पर सर्वसम्मति बनती है तो मैं फिर तैयार हूं.इस मौक़े पर बड़ी संख्या में शहर के सम्मानित शख़्सियतें मौजूद थीं.

कौन हैं सैफुल्लाह रहमानी?

मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी दरभंगा के रहने वाले हैं.ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दिवंगत अध्यक्ष क़ाज़ी मुजाहिदुल इस्लाम क़ासमी के भतीजा हैं.सैंकड़ों किताबों के लेखक हैं.देश के बड़े उलेमा में इनका नाम आता है.वर्तमान में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव हैं.सहाफ़ी भी हैं.मौजूदा सियासी हालात पर देश भर के अख़बारों में इनका लेख प्रकाशित होता है.अभी समान नागरिक संहिता पर इनके लेख को ख़ूब पसंद किया जा रहा है.लेख में इन्होंने इसके नुक़्सानात का ज़िक्र किया है.शरीयत और इस्लामी क़ानून(फिक़ह)पर इनकी ज़बरदस्त गिरफ़्त है.सामाजिक और सियासी जानकर भी उतना ही हैं.पद का लोभ नहीं है.अमीर ए शरीयत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी के इंतेक़ाल के बाद इन्हें बोर्ड का महासचिव नियुक्त किया गया.अभी तक अमीर ए शरीयत के लिए ख़ुद से तैयार नहीं हैं,पद के लिए किसी तरह की लॉबिंग से परहेज़ है.इनकी सादगी ही इनकी पहचान है.अमीर ए शरीयत के चुनाव को जटिल बना देने से उत्पन्न विवाद के बाद इन पर लोगों की नज़र टिक गयी है.बहुत आग्रह के बाद वह तैयार हुए हैं.उन्होंने नायब अमीर ए शरीयत मौलाना शमशाद रहमानी के चुनावी प्रक्रिया को शरीयत के खिलाफ बताया है.

इमारत ए शरिया में मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी

चुनाव को लेकर विवाद

अमीर ए शरीयत के चुनावी तरीक़ा ए कार को लेकर भारी विवाद है.नायब अमीर ए शरीयत को चुनाव के लिए अधिकृत किया गया है.उन्होंने इसके लिए 11 सदस्यीय कमिटी गठित कर दी है.मगर कमिटी की तानाशाही रवैया से खफ़ा हो कर मुफ्ती तौहिद नज़र ने इस्तीफ़ा दे दिया.कमिटी ने निर्णय किया है कि अमीर ए शरीयत का चुनाव बैलट पेपर से होगा.भारत के इस्लामिक इतिहास में कभी भी मज़हबी पेशवा का चुनाव बैलट पेपर से नहीं हुआ है.आरोप है कि खानक़ाह रहमानी के सज्जादानशीं और मौलाना वली रहमानी के बड़े सुपुत्र अमेरिकन रिटर्न अहमद फ़ैसल रहमानी को अमीर ए शरीयत बनाने के लिए नायब अमीर ए शरीयत और कोलकाता में बैठे एक मौलाना ने यह रणनीति रची है.विवाद का असल जड़ यही है.चुनाव के लिए पंद्रह सेंटर बनाये गये हैं.इमारत ए शरिया पटना फुलवारीशरीफ में है.मगर पटना में एक भी सेंटर नहीं बनाया गया.पटना से दूर बाढ़ में एक सेंटर बनाया गया है.कहा जा रहा है कि बाढ़ में जिनके घर सेंटर बनाया गया है,वह 11 सदस्यीय कमिटी के सदस्य भी हैं.इस कमिटी में मुंगेर खानकाह से भी दो सदस्य हैं.फैसल रहमानी के समर्थकों की इसमें भरमार है.फैसल रहमानी के मार्ग को उनके ही शुभचिंतकों ने नादानी या हठधर्मी में अवरुद्ध कर दिया.

क्या कहते हैं अशफ़ाक़ रहमान?

अमीर ए शरीयत के चुनाव को क़रीब से देख रहे और सुझाव दे रहे जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय संयोजक अशफ़ाक़ रहमान ने सर्वसम्मति से अमीर ए शरीयत चुने जाने को सही रास्ता बताया है.उन्होंने समय मंथन से कहा है कि मिल्लत को इंतेशार से निकालने और विवाद के ख़ात्मा के लिए आगे आकर अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेनी चाहिए.मौलाना निज़ाम उद्दिन साहब और मौलाना वली रहमानी साहब के बीच अमीर ए शरीयत के लिए टकराव हो जाने पर उनके वालिद वली रहमानी साहब ने अमीर ए शरीयत के चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था.फैसल रहमानी साहब को अपने ख़ानदानी अज़मत के लिए वालिद साहब के नक़्स ए क़दम पर चलते हुए आवाम की राय को लब्बैक कहना चाहिये.इमारत ए शरिया और मिल्लत के इत्तिहाद के लिए यह ज़रूरी है.

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