पटना/मंथन डेस्क

बिहार प्रदेश राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि बिहार में प्रशासन के द्वारा दो तरह की नीति अपनाई जा रही है एक ओर जहां राजद के द्वारा 07 अगस्त 2021 को जातीय जनगणना कराने, मंडल आयोग की शेष सिफारिशों को लागू करने , आरक्षण के दायरे में आने वाले बैकलॉग की सीटें को भरने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया था , तब उसे इनकम टैक्स चौराहे पर ही रोक दिया गया था और आज सत्ताधारी जनता दल यू के नेताओं के जुलूस को गाजे-बाजे के साथ शहर भर में घुमाया जा रहा है तो इससे न विधि व्यवस्था का संकट खड़ा हो रहा है और न ही कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन क्या सुशासन के नाम पर इसी तरह की व्यवस्था चलती रहेगी , यह उसी तरह है कि ” सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का ” और सत्तारूढ़ दल के लोग लगातार स्वागत कार्यक्रम करके कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं.प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ.


एजाज ने आगे कहा कि जदयू का कार्यक्रम ऊंची दुकान फीकी पकवान जैसा दिखा.जहां नीतीश कुमार के द्वारा जातीय जनगणना के समर्थन में बातें की जा रही हैं ,वही दूसरी ओर आर सी पी सिंह चुप्पी साध कर भाजपा को मदद कर रहे हैं , यह जदयू की कौन सी नीतियां हैं , नीतीश जी को स्पष्ट करना चाहिए .इन्होंने ने कहा जदयू के नेताओ में आपसी जुतम पैजार की स्थिति है, वहीं मुख्यमंत्री इस मामले में पर्दादारी करना चाह रहे हैं, लेकिन बिहार की जनता के सामने जदयू की सारी बातें स्पष्ट हो गई .जदयू में दो धारा है जहां एक धारा जातीय जनगणना का पक्षधर है, वहीं दूसरी धारा भाजपा के साथ खड़े होकर नीतीश कुमार के नेतृत्व को ही चैलेंज कर रहा है .अब नीतीश कुमार मूकदर्शक बनकर पर्दादारी करके अपनी कुर्सी बचाने में भलाई समझ रहें हैं.


एजाज ने कहा कि अफसोस की बात है कि जहां कोरोना और बाढ में सैकड़ों लोगों की जानें गई , कच्ची दरगाह में हुई नाव दुर्घटना में बड़ी संख्या में लोगों की मौतों पर पूरा राज्य और मृतक के परिवार के लोगों के सामने मातम की स्थिति है ,वहीं जदयू के नेताओं के द्वारा ऐसे समय स्वागत में ढोल नगाड़े से शोक संतप्त परिवार के दिलों को ठेस पहुंचाया जा रहा है .यह सरकार में रहने का अहंकार में कहीं ना कहीं आम जनता के दिलों पर चोट किया जा रहा है ,जो दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.

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