बेगूसराय/कौनैन

बिहार के बेगूसराय जिले से बीड़ी मजदूरों का एक अफसोसनाक खबर सामने आई है.जहां बीड़ी मजदूर अपनी हालत पर आंसू बहाने को बेबस हैं.केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही योजना बीड़ी श्रमिक कल्याण कोष अधिनियम 1976 के तहत बीड़ी मजदूरों के लिए सरकारी आवास, शिक्षा, स्वास्थ, संबंधित क्षेत्रों के लिए योजनाएं चल रही है.लेकिन बीड़ी मजदूर इन योजनाओं के लाभ से अब तक वंचित है.बेगूसराय में बीड़ी मजदूरों की तादाद की बात करें तो करीब 40 हजार से ज्यादा है.

लेकिन सरकार की उदासीनता कहें या अफसरशाही की इन बीड़ी मजदूरों हालत का कोई सुधि लेने वाला नहीं। आजाद बीड़ी यूनियन के महासचिव डॉ.एहतेशाम उल हक अंसारी ने मिडिया को बताया कि बेगूसराय जिले के लड़वारा गांव में लगभग 90% अल्पसंख्यक तबके की महिलाएं बीड़ी बनाकर जीवन यापन करती हैं.लेकिन बीड़ी मजदूर महिलाओं का कोई दर्द सुनने वाला नहीं.वर्ष 2007 में 278 बीड़ी मजदूर के आवास निर्माण के लिए 40 हजार में से सरकार ने पहली किस्त की राशि 24 हजार रूपये दिए थे.

मगर 16 वर्ष बीत जाने के बाद भी आवास निर्माण की दूसरी किस्त की राशि नहीं मिलने से इन बीड़ी मजदूरों का घर आधा अधूरा ही रह गया.इस मामले पर पटना हाईकोर्ट ने भी बीड़ी मजदूरों को आवास निर्माण के लिए दूसरी किस्त देने का आदेश बेगूसराय जिला पदाधिकारी को दे रखा है. पदाधिकारी के उदासीनता के कारण उन बीड़ी मजदूरों को आवास निर्माण के दूसरी किस्त की राशि नहीं मिल पाई है.बीड़ी मजदूर शमीम अंसारी, रजिया खातून, समीना खातून, नजराना खातून, गुलशन आरा, हलीमा खातून, मुस्तरी खातून काली देवी मंजू देवी , अनीसा खातून ने बताई कि अगर आवास निर्माण की दूसरी किस्त की राशि नहीं मिलती है तो हम सभी बीड़ी मजदूर मिलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने आत्मदाह करेंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *