•महिलाओं ने एक सुर में कहा- परिवार नियोजन अपनाएंगे, समाज में खुशहाली लाएंगे
•माता बैठक कर परिवार नियोजन के प्रति किया गया जागरूक
• छोटा और सुखी परिवार के लिए चिंतित महिलाओं ने की चर्चा
• जिले में चल रहा जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा

मधुबनी/करीमुल्लाह

छोटा व सुखी परिवार के लिए चिंतित महिलाएं घर की दहलीज पार कर माता बैठक में उत्साह के साथ पहुंची.परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों पर खुलकर चर्चा की.जिले के रहिका प्रखंड के हुसैनपुर पंचायत, वार्ड नंबर 1 आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 43 पर माता बैठक आयोजित किया गया.बैठक के बाद उपस्थित महिलाओं के द्वारा जागरूकता रैली भी निकाली गई.बैठक में महिलाओं को परिवार नियोजन के साधनों के बारे में जानकारी दी गई.एक संतान वाले दंपतियों को परिवार नियोजन के बारे में जानकारी दी गई.जिसमें गांव की महिलाएं उत्साह के साथ परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों पर चर्चा की और स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार करने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की.केयर इंडिया के प्रखंड समन्वयक अमित कुमार विपुल ने बताया कि परिवार कल्याण कार्यक्रम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा तथा जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा मनाया जाएगा.इस अभियान के तहत समुदाय स्तर पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता फैलायी जा रही है.इस अभियान का असर भी देखने को मिल रहा है.जिसका परिणाम है कि गांव की महिलाएं घर की दहलीज पार कर माता बैठक में शामिल हो रही हैं और इस पर चर्चा भी कर रही हैं.

प्रखंड समन्वयक अमित कुमार विपुल ने बताया परिवार नियोजन को लेकर लोगों को जागरूक करने के दौरान स्थाई एवं अस्थाई उपायों के साथ-साथ समय अंतराल की भी जानकारी दी गई.जिसमें बताया गया कि अगर कोई महिला परिवार नियोजन बंध्याकरण के लिए इच्छुक हैं किन्तु, उनका शरीर बंध्याकरण के लिए सक्षम नहीं है तो ऐसी महिला अस्थाई उपायों को भी अपना सकती हैं.ऐसी महिलाओं के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है.जिसमें कंडोम, छाया, अंतरा, कॉपर – टी समेत अन्य वैकल्पिक साधन शामिल हैं.इस बैठक में मुख्य रूप से शून्य या एक सन्तान वाली महिलाओं को शामिल किया गया था.

सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया परिवार नियोजन को अपनाने से ना सिर्फ छोटा और सीमित परिवार होगा, बल्कि, महिलाओं का बेहतर शारीरिक विकास भी संभव होगा.साथ ही इससे परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी.जिससे आप अपने बच्चों को उचित परवरिश के साथ अच्छी शिक्षा हासिल कराने में समर्थ होंगे.इससे समाज में अच्छा संदेश जाएगा और सामाजिक स्तर पर लोग परिवार नियोजन साधनों को अपनाने के प्रति अधिक जागरूक होंगे.उन्होंने बताया सीमित परिवार के कारण बच्चों की उचित परवरिश होती है जिससे वह मानसिक और शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहते हैं.

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