अमीर ए शरीयत का चुनाव 8 अगस्त को है.मगर फैसल रहमानी के खिलाफ कोई तगड़ा उम्मीदवार अभी तक मैदान में नहीं है.इसलिए रेस में वह सबसे आगे हैं.

मदाख़लत/सेराज अनवर

अमीर ए शरीयत का चुनाव 8 अगस्त को है.मगर फैसल रहमानी के खिलाफ कोई तगड़ा उम्मीदवार अभी तक मैदान में नहीं है.इसलिए रेस में वह सबसे आगे हैं.अमीर ए शरीयत के चुनाव के लिए गठित कमिटी के अधिक्तर सदस्यों का सपोर्ट फैसल रहमानी को है.इसलिए कहा जा रहा है कि अहमद वली फैसल रहमानी ही अमीर ए शरीयत होंगे.कमिटी ने इनके नाम पर लगभग मुहर लगा दी है.8 अगस्त को चुनाव की सिर्फ खानापूर्ति होनी है.दीगर बात है कि अमीर ए शरीयत के चुनाव में पहली बार सर्वसम्मति नहीं बन पा रही है.मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी,मौलाना अनीस उर रहमान क़ासमी,मौलाना तौहिद नज़र भी इस पद के दावेदार हैं.तौहिद नज़र और अनीस उर रहमान क़ासमी,फैसल रहमानी के कट्टर मुख़ालिफ़ माने जाते हैं.पेंच यहीं पर फंसा हुआ है.अन्यथा फैसल रहमानी के सर्वसम्मति से अमीर ए शरीयत बनने में कोई रुकावट नहीं थी. मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी की अमीर ए शरीयत बनने की चाहत तो है मगर वह चाहते हैं कि सम्मानजनक तरीक़े से उन्हें अमीर ए शरीयत की कुर्सी पर बैठा दिया जाये.ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी ख़ुद इस दौड़ से बाहर हैं.उनकी दावेदारी उतनी पुख़्ता नहीं है.अनीस उर रहमान क़ासमी की बहुत बदनामी है.उन्हें नाज़िम के ओहदे से इस्तीफ़ा दे कर हटना पड़ा था.लॉबिंग तो वह बहुत ज़ोरदार कर रहे हैं लेकिन बात बन नहीं रही है.मौलाना तौहिद नज़र झारखंड से हैं सो बिहार की पसंद नहीं हो सकते.ले दे कर फैसल रहमानी अकेले उम्मीदवार बच जाते हैं.इनका अमीर ए शरीयत बनना लगभग तय है.बिहार में मुस्लिम राजनीति,सामाजिक सरोकार से जुड़ा सबसे विश्वसनीय चेहरा जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय संयोजक अशफ़ाक़ रहमान ने फैसल रहमानी के नाम प्रस्तावित कर विवाद को ख़त्म करने का प्रयास किया है.उन्होंने कहा है कि फैसल रहमानी बेहतर अमीर ए शरीयत हो सकते हैं,जो इमारत ए शरिया को बुलंदी पर ले जायेंगे.

कौन है फैसल रहमानी?

अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से आईटी करने के साथ इसी यूनिवर्सिटी में लेक्चरर भी बने. ऑपरेशन मैनेजमेंट के ओहदे पर रहते हुए दर्जनों आर्गेनाइजेशन में अहम भुमिका भी निभा चुके हैं.अहमद वली फैसल रहमानी एक प्रतिष्ठित अमेरिकी संस्थान के डायरेक्टर ऑफ स्ट्रेटजिक प्रोजेक्ट भी रह चुके है. इसके आलावा उन्होंने ओरेकल, एडोब, पैसिफिक गैस एंड इलेक्ट्रिक, ब्रिटिश पेट्रोलियम और डिजनी जैसी कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं.पेशावराना और प्रबंधन की समझ उनकी बातों से ही झलकती है.इन्होंने इस्लामिक और अरबी की गहरी पकड़ मिस्र के कई इदारों से हासिल की है.मरहूम मौलाना मोहम्मद वली रहमानी के बाद अब खानकाह रहमानी, जामिया रहमानी और रहमानी फाउंडेशन के जिम्मेदार भी फैसल रहमानी ही हैं.फैसल लम्बे वक्त तक अमेरिका की सरजमीं पर खिदमत करने के बाद, मुंगेर अपने पिता की विरासत और रियासत के उत्तराधिकारी तय हुए हैं. जो अरबी, अंग्रेजी की अच्छी समझ के साथ दीनी और दुनियावी तालीम दोनों में योग्यता रखते हैं.फैसल रहमानी की खानकाह रहमानी के पांचवें सज्जादानशीं के तौर पर ताजपोशी हुई है. उन्हें परदादा हजरत मौलाना मोहम्मद अली मुंगेरी का इमामा बांधकर और दादा मौलाना मिनतुल्लाह रहमानी का एबा पहनाकर हजरत मुंगेरी की मसनद पर बैठाया गया.

इमारत ए शरिया क्या है?

इमारत-ए-शरिया ने अपने सौ साल के लंबे सफर में शरीयत की हिफाजत के साथ सामाजिक सौहार्द और साझी विरासत को आयाम देने में महती भूमिका निभाई है.इमारत इमारत-ए-शरिया केवल अल्पसंख्यकों के लिए ही नहीं, बल्कि वंचित तबके के लोगों के उत्थान और तरक्की के लिए अनेक कार्यक्रम सफलतापूर्वक चलाकर सेवा करती आ रही है.इमारत तीन राज्यों बिहार,झारखंड,ओड़िसा में फैला है.यह मुसलमानों की प्रतिनिधित्व संस्था है.अमीर ए शरीयत का ओहदा सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण है.अशफाक़ रहमान कहते हैं कि अमीर ए शरीयत बेदाग़ शख़्स को होना चाहिए और जो शरीयत के साथ सामाजिक.सियासी समझ भी रखता हो.तारीख़ तय होने के बाद इमारत निष्पक्ष चुनाव की तैयारी में जुटी है.अमीर ए शरीयत के लिए आठ सौ से अधिक लोग वोट डालेंगे.कोरोना गाइडलाइन के कारण इतने लोगों को एक जगह पर इकट्ठा करना आसान नहीं है.इसलिए कई जगहों पर मतदान केंद्र बनाया जा रहा है.सभी केंद सीसीटीवी की निगरानी में होंगे.पटना,कोलकाता,रांची,राउरकेला,भागलपुर आदि में सेंटर हो सकते हैं.वोट बैलट पेपर पर होंगे.एक तजवीज़ है कि मतदाताओं के विवेक पर छोड़ दिया जाये कि वह अमीर ए शरीयत किसे पसंद करते हैं.नाम लिख दें.यदि ऐसा हुआ तो भी फैसल रहमानी की जीत पक्की है.क्यों मुख्य कमिटी में दिवंगत अमीर ए शरीयत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी के समर्थकों और फैसल रहमानी के शुभ चिंतकों की संख्या बहुत अधिक है.फैसल,वली रहमानी के सुपुत्र हैं.

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