मदाख़लत/सेराज अनवर

अहमद वली फैसल रहमानी के अंधभक्त जिस तरह से अमीर ए शरीयत का खेल खेल रहे हैं,उससे इमारत ए शरिया में बग़ावत के आसार उत्पन्न हो रहे हैं.चुनाव बीच में अटक सकता है,अदालत में भी मामला जा सकता है.अंधभक्तों की इस चाल में अमीर ए शरीयत के सबसे तगड़े उम्मीदवार फैसल रहमानी की कितनी सहभागिता है नहीं पता,लेकिन इमारत ए शरिया के दस्तूर से अलग नवगठित 11 सदस्यीय कमिटी की ग़ैर जम्हूरी तरीक़ाकार से ग़ुस्सा इतना ज़बरदस्त है कि कमिटी के सबसे अहम सदस्य मौलाना तौहीद नज़र ने इस्तीफ़ा दे दिया है.उनका त्यागपत्र कमिटी के कामकाज के तरीक़े पर सवाल खड़ा कर रहा है.इमारत के अंदर अलग तरह की सुगबुगाहट है.नायब अमीर ए शरीयत से एक भी स्टाफ ख़ुश नहीं है.इमारत से मुहब्बत या नौकरी बचाने की वजह कर आक्रोशपूर्ण खामोशी छायी हुई है.नायब अमीर ए शरीयत मौलाना शमशाद रहमानी के बारे में कहा जा रहा है कि एकदम नातजुर्बाकार आदमी हैं.सांगठनिक काम का कोई तजुर्बा ही नहीं है.इमारत से उनका कोई गहरा लगाव भी नहीं रहा है.उनका नाम अचानक तब सुना गया जब उनके शुभचिंतकों ने इमारत ए शरिया को बताया कि मौलाना शमशाद रहमानी को नायब अमीर ए शरीयत बनाया गया है.

नायब अमीर ए शरीयत मौलाना शमशाद रहमानी

तत्कालीन अमीर ए शरीयत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने अपनी ज़िंदगी में इसका बजाबता एलान नहीं किया था.अब वह इस दुनिया में हैं नहीं,वही बता सकते थे कि वाक़ई उन्होंने मौलाना शमशाद रहमानी का नाम प्रस्तावित किया?जब अमीर ए शरीयत पारस में एडमिट थे तो एक दिन अचानक नायब का रजिस्टर इमारत में घुम गया और लोगों ने अमीर ए शरीयत का आदेश मान कर इसे तसलीम कर लिया.जबकि अमीर ए शरीयत पारस के कोविड वार्ड में एडमिट थे,उनसे किसी को भी मिलने की मनाही थी.काफी कमज़ोर पड़ गये थे.अपने हाथों से कुछ तहरीर नहीं कर सकते थे,दस्तखत भी नहीं.नायब अमीर ए शरीयत नामज़द किये जाने का मामला एक अलग तरह का मुअम्मा है?

मौलाना तौहीद नज़र का त्यागपत्र

बहरहाल,इन लोगों को पहले से मालूम था कि अमीर ए शरीयत कुछ दिन के मेहमान हैं.जहां पूरी क़ौम उनकी सेहतयाबी की दुआ मांग रही थी,वहीं अलग तरह का खेला चल रहा था.भविष्य के कीलकांटे दुरुस्त किये जा रहे थे,जो आज प्रत्यक्ष दिख रहा है.एक शख़्स को अमीर ए शरीयत बनाने के लिए न शुरा की बात मानी जा रही,न इमारत के दस्तूर की.शुरा ने तय किया था कि कोविड से हालात नार्मल हो जाने के बाद चुनाव का आयोजन हो.

हालात यह हैं कि कोरोना से ख़तरे के कारण धार्मिक स्थल बंद हैं.दूसरे साल भी मस्जिदों और ईदगाहों में बक़रीद की नमाज़ अदा नहीं की गयी.इमारत ए शरिया और नायब अमीर ए शरीयत को इसकी चिंता नहीं है मगर अमीर ए शरीयत के चुनाव को लेकर चिंता इनकी देखने लायक़ है.एक दो जगह नहीं पंद्रह जगहों पर चुनाव का सेंटर बनाया गया है.अब सोचिये,कोरोना को लेकर सरकार की गाइडलाइन की धज्जियां कैसे उड़ेंगी?

शुरा ने नायब अमीर ए शरीयत को एक कमिटी गठित करने को अधिकृत किया था.कमिटी का काम सिर्फ उन सदस्यों की रिक्ति को पूर्ति करना था,जिनका निधन हो गया है.मौलाना शमशाद रहमानी ने 11 सदस्यीय कमिटी गठित कर सभी ज़िम्मेदारी अपने हाथ में ले ली.शुरा और अरबाब हल वो अक़्द(लगभग 800 सदस्यीय कमिटी जिसको वोटिंग का अधिकार है)के अख़्तियार को गौण कर दिया.कमिटी की मनमानी से खफ़ा मौलाना तौहीद नज़र ने यह कह कर इस्तीफ़ा दे दिया . . . साक़ी ने कुछ मिला न दिया हो शराब में

इस्तीफ़ानामा का दूसरा पृष्ठ

उन्होंने मौलाना शमशाद रहमानी के नाम खुला खत में कहा है कि आप अमीर ए शरीयत के चुनाव को लेकर निष्पक्ष नहीं हैं.इमारत ए शरिया में ग़ैर शरई,ग़ैर असंवैधानिक,अनैतिक हस्तक्षेप इमारत की आत्मा के खिलाफ आपका संरक्षण प्राप्त है.अतः आपकी पक्षपाती मानसिकता के साथ रहना और काम करना मेरे लिए बहुत मुश्किल है.इस वजह से 11 सदस्यीय कमिटी से इस्तीफ़ा देता हूं.अमीर ए शरीयत के चुनाव पर समय मंथन किस्तवार ख़बर प्रस्तुत कर रहा है.दूसरी किस्त का इंतेज़ार करें

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