पटना(एस अनवर)ये बताने की ज़रुरत नहीं कि बिहार ने देश को हर मौके पर नेतृत्व किया है। चाहे वो सियासी मामला रहा हो या फिर विकास का मामला। बिहार ने दिखाया है कि वो किस तरह से लोगों के कल्याण के लिए काम करने का इरादा और संकलप रखता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुबे की आधी आबादी के लिए हमेशा एतिहासिक फैसला किया है। चाहे वो पंचायत में महीलाओं को आरक्षण देने का मामला हो या शिक्षा में महिलाओं के उत्थान का मामला। बिहार के मुख्यमंत्री ने इस बात की हमेशा कोशिश की है कि बिहार की बेटियों को हर वो अवसर प्राप्त हो जिससे वो अपनी जिन्दगी की उड़ान में नये बाब का इज़ाफा कर सकें।

2 जुनबिहारकेइतिहासमेंहमेशायादरखाजाएगा।मुख्यमंत्रीनीतीशकुमारनेवोकामकरदिखायाजोसदियोंमेंनहीहुआ.सुबेकीआधीआबादीकेविकासकेलिएमुख्यमंत्रीनेऐतिहासिकफैसलाकियाहैकिराज्यकेसभीइंजीनियरिंगऔरमेडिकलकॉलेजोंमेंबिहारकेछात्राओंको 33 फीसदीआरक्षणमिलेगा।

2 जुन बिहार के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वो काम कर दिखाया जो सदियों में नही हुआ। सुबे की आधी आबादी के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक फैसला किया है कि राज्य के सभी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में बिहार के छात्राओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इस सिलसिले में कार्यवाई भी शुरु कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि सभी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में नामांकन में न्यूनतम एक तिहाई सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित की जाएगी। जदयू नेता और पूर्व सांसद डॉ मोनाजिर हसन ने इसका स्वागत किया है। मोनाजिर हसन ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस फैसले से राज्य की बेटियों को जहां तकनीकी शिक्षा हासिल करने में आसानी होगी वही बिहार में रह कर ही वो अपने ख्वाबों को पुरा कर उनहें राज्य देश की सेवा करने का मौका मिलेगा।

डॉमोनाजिरहसनकेमोताबिकमुख्तमंत्रीशुरुसेहीमहिलाओंकीशिक्षाऔरउनकेविकासकोलेकरचिंतितरहेहैं।पंचायतचुनावमेंमहिलाओंकोआरक्षणदिया।

डॉ मोनाजिर हसन के मोताबिक मुख्तमंत्री शुरु से ही महिलाओं की शिक्षा और उनके विकास को लेकर चिंतित रहे हैं। पंचायत चुनाव में महिलाओं को आरक्षण दिया। प्रारंभिक शिक्षकों के नियोजन में 50 प्रतिशत, पुलिस बहाली में 35 प्रतिशत और विभिन्न नौकरियों में 33 प्रतिशत का आरक्षण देकर महिलाओं का सम्मान बढ़ाया है। इसके साथ ही उनके शिक्षा को लेकर काफी संजिदा कोशिश की गई है। 12वीं पास लड़कियों को 25 हज़ार रुपया देने समेत साइकल और पोशाक योजना से गांवों की गरिब लड़कियों को स्कुल के दहलीज तक लाने की कोशिश की गई है। डॉ मोनाजिर हसन का कहना है कि निसंदेह इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से राज्य की शैक्षणिक स्तर बदलने समेत बिहार की बेटियों का मुकद्दर भी बदलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *